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चौखंडी स्तूप

Varanasi, IN

पाँचवीं शताब्दी में इसे बनाया गया था। यदि आप बनारस से सारनाथ जाते हैं तो सबसे पहले आपको यही स्तूप दीखता है जो सड़क के बायीं ओर है। स्तूप एक बड़े से चबूतरे पर है और यह तीन स्तरों या मंजिलों में बना हुआ है। इसके सबसे नीचे के चबूतरों के आलों में बुद्ध मूर्तियाँ हैं। सबसे ऊपरी भाग में मुग़ल काल में बनाय

ी गयी एक अष्टकोणीय छतरी बनी हुई है जो नीचे की संरचना से मेल नहीं खाती। जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध हिंदी कहानी "ममता" इसी छतरी की कथा के आधार बार लिखी गयी है। स्तूप का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किया जाता है। संरक्षण कि स्थिति अच्छी है। स्तूप के परिसर के उत्तरी भाग में बाग़ भी है जहाँ कुछ देर विश्राम किया जा सकता है।

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